हर्ष सैनी (हरिद्वार) ; {हरियाणा/समालखा} – जब हृदय में प्रेमाभक्ति का प्रकाश जागृत होता है, तब जीवन का प्रत्येक भाव प्रेम, समर्पण और मानव एकत्व की दिव्य अनुभूति से महक उठता है। इसी आध्यात्मिक चेतना एवं प्रेमपूर्ण संदेश से ओतप्रोत निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने समालखा (हरियाणा) स्थित निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित चार दिवसीय 79वें वार्षिक निरंकारी सन्त समागम के प्रथम दिवस पर देश-विदेश से सम्मिलित हुए लाखों श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए प्रेम, भक्ति और मानवीय एकत्व की महत्ता को उजागर किया। सतगुरु माता ने अपने पावन प्रवचनों में कहा कि ब्रह्मज्ञान जागृति का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि इसकी शुरुआत है। सच्ची जागृति वही है, जब मनुष्य जीवन के प्रत्येक पल में निराकार के एहसास के साथ प्रेम, विश्वास और विनम्रता से जीवन व्यतीत करे। सत्संग में केवल उपस्थित होना पर्याप्त नहीं, बल्कि वहाँ से प्राप्त शिक्षाओं को अपने व्यवहार में अपनाना आवश्यक है। हमारी सेवा और समर्पण दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे भावों से युक्त होना चाहिए। दूसरों के प्रति प्रेम रखना, निंदा और अहंकार से बचना तथा अपनी वाणी और कर्मों से अच्छाई दर्शाना ही वास्तविक आध्यात्मिक जागृति की पहचान है। सतगुरु माता ने प्रेरित किया कि परमात्मा द्वारा प्रदत्त साधनों का उपयोग मानवता की सेवा एवं परोपकार के लिए किया जाए। जीवन की हर परिस्थिति में मन की शांति, सहजता और विश्वास बनाए रखें। अंत में माता जी ने आशीर्वाद देते हुए कामना की कि सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सेवा, सुमिरन और सत्संग के प्रति समर्पण बना रहे तथा ब्रह्मज्ञान से प्राप्त दिव्य प्रकाश सदैव उनके जीवन को प्रेम, शांति और भक्ति से आलोकित करता रहे। देश-विदेश से विभिन्न संस्कृतियों एवं पृष्ठभूमियों के श्रद्धालुओं का यह प्रेमपूर्ण मिलन समागम स्थल को भक्ति, एकत्व और सद्भावना के दिव्य भावों से गुंजायमान कर रहा था। दूसरा दिन (सेवादल रैली) – समागम के दूसरे दिन का शुभारम्भ भव्य सेवादल रैली से हुआ, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों एवं विदेशों से सम्मिलित हुए हजारों सेवादल बहन-भाइयों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शारीरिक व्यायाम, स्किट, खेलकूद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं मिशन की शिक्षाओं पर आधारित लघु नाटिकाओं के माध्यम से अनुशासन, सहयोग और निःस्वार्थ सेवा का सुंदर संदेश दिया गया। सेवादल रैली में उपस्थित भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए सतगुरु माता ने संदेश दिया कि सेवा केवल ड्यूटी निभाने तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न अंग है। सच्चा सेवादार वही है, जो निरंकार को हृदय में बसाकर हर परिस्थिति में मानवता के कल्याण के लिए तत्पर रहे। सतगुरु माता ने प्रेरित किया कि निरंकार पर अटूट विश्वास रखते हुए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं तथा तन, मन और धन को परोपकार में लगाकर जीवन को सार्थक बनाएं। इससे पूर्व, सतगुरु माता जी के करकमलों द्वारा शांति एवं एकत्व के प्रतीक मिशन के ‘श्वेत ध्वज’ का ध्वजारोहण किया गया। रैली के दौरान संत निरंकारी सेवादल के मुख्य संचालक एस के जुनेजा ने विश्वभर से आए सेवादल स्वयंसेवकों की ओर से सतगुरु माता जी के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए सभी के लिए पावन आशीर्वाद की कामना की। Post Views: 3 Post navigation आध्यात्मिक जागृति की दिव्य आभा में 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का भव्य आगाज ; 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का यह प्रथम दिवस आध्यात्मिक जागृति, मानवता, सेवा और विश्वबंधुत्व की भावना को समर्पित रहा