हर्ष सैनी (हरिद्वार) हरिद्वार – खबर हरिद्वार से जहां हरिद्वार की युवा नृत्य शिक्षिका मुस्कान सिंघल आज धार्मिक और सांस्कृतिक नृत्य की एक अलग पहचान बन गई हैं। पिछले 3 वर्षों से मुस्कान निःस्वार्थ भाव से छोटे-छोटे बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण, महाभारत और सनातन संस्कृति पर आधारित धार्मिक नृत्य की शिक्षा दे रही हैं। शिवालिक नगर प्राचीन मंदिर में जन्माष्टमी के मौके पर मुस्कान के छात्रों ने अद्भुत आध्यात्मिक प्रस्तुति दी है।

मुस्कान बताती हैं कि बचपन से रामायण देखती आ रही है वही से मिला है अध्यात्म का ज्ञान, मुस्कान चाहती है कि बच्चों को पता होना चाहिए इतिहास सनातन, क्या है। बलिदानों का ज्ञान होना जरूरी है। जन्माष्टमी उनके लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि साधना है। जन्माष्टमी की प्रस्तुति के लिए वे 2 महीने पहले से ही बच्चों के साथ रोजाना कड़ी प्रैक्टिस शुरू कर देती हैं। हर एक स्टेप, हर एक भाव और हर एक कहानी को बच्चों को बारीकी से समझाया जाता है ताकि मंच पर सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि भक्ति जीवंत हो उठे। बच्चों को घर जैसा माहौल देने वाली मुस्कान हरिद्वार में रहती है। हरिद्वार की मुस्कान उन लोगों में से एक है जो पर्दे पीछे रहकर नयी पीढ़ी के भविष्य को निखारने का कार्य कर रही है। इतना ही नहीं उनके। छात्र भी उनको प्रेमपूर्व बुआ कहकर संबोधित करते है।

इस वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर मुस्कान और उनके छात्रों द्वारा दी गई प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। महाभारत के प्रसंग पर आधारित इस प्रस्तुति में 16 वर्षीय अभिमन्यु के शौर्य और चक्रव्यूह भेदन की गाथा को नृत्य के माध्यम से बेहद शानदार तरीके से दर्शाया गया। छात्रों की भाव-भंगिमा, वेशभूषा और सटीक अभिनय ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।

मुस्कान का उद्देश्य है कि आज की पीढ़ी मोबाइल और पाश्चात्य संस्कृति से निकलकर अपनी जड़ों, अपने धर्म और अपनी संस्कृति से जुड़े। वे कहती हैं, “जब बच्चे राधा-कृष्ण और अभिमन्यु जैसे पात्रों को नृत्य के माध्यम से जीते हैं, तो उनमें संस्कार खुद-ब-खुद आ जाते हैं।” मुस्कान जैसे लोग वास्तव में देश को मजबूत बनाने के साथ साथ एक जिम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य निभा रहे है।

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